4-5th December, 2015 were the polling days for the process that happens once every three years, ICAI Elections for choosing Regional councils and Central Council. Large number of candidates had been campaigning heavily in the last 3 months reaching out to probable voters through in-person meetings, calls, SMSs, Whatsapp messages and videos and every other possible means of communication. While the process just ended yesterday, I just penned down few lines on the whole election scene which I witnessed.

a-ballot
आज खुद को बहुत अकेला मैंने पाया,
ना एक बार भी संदेशा किसी का भी आया,
क्या यह मेला फिर तभी शुरू होगा,
जब पैग़ाम दोबारा चुनाव का आया।

इस बार चुनाव में संहिता का उल्लंघन होते देखा है,
स्वःचलित कॉल्स से परेशान लोगों से उसका बहिष्कार होते देखा है,
कई रंगीन सपने दिखा कर वोट तो कई लोगों ने माँगे,
पर बहुत कम थे जिन्हें पेशे का सुधार करते देखा है।

लोकतंत्र के नाम पे पैसा लुटाते हुए देखा है,
दूसरे की बुराई में अपना प्रचार करते देखा है,
दोस्ती और शहर के नाम पे वोट तो कई लोगों ने माँगे,
पर बहुत कम थे जिन्हें काम के बल पे वोट मांगते देखा है।

जिनको मैंने इन दिनों में रोज़ वोट के लिए आते देखा है,
क्या मैंने इन सबको 3 साल में आखरी बार देखा है,
एक ही खबर को अलग अलग शब्दों में फैलाया था सभी ने,
चुनाव के बाद खबरों के जाल का अंत होते देखा है।

डब्बों में बंद हुए मतदान पत्र कई हज़ार,
आने वाले समय का इंतज़ार करें सभी उम्मीदवार,
कुछ लोगों को मिले होंगे सौ वोट, कुछ को मिलेंगे हज़ार,
देखना है कौन कौन पार करेगा वो जादुई आँकड़ा इस बार।

आशा करते हैं, जीत जाएँ वो उम्मीदवार,
जो लगाएँ हमारे पेशे की नौका पार,
सदस्यऔर विद्यार्थी, दोनों का हो उद्धार,
काश हमने चुने हो ऐसे उम्मीदवार इस बार।

I hope many of you will certainly agree with the above lines. However, I deem it safe to add a disclaimer in the end that the above lines are just a lighter take on the whole election season I witnessed and not meant to target any specific person.

8 thoughts on “CA Elections 2015”

  1. Very well said simar…. Thy actually become visible after a gap of 3 yrs.. …i hope is baar esa na ho….

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