I woke up on 14th November morning with the news notification flashing on mobile screen about the Paris attacks. The attacks had been carried out in a synchronous manner, almost similar to that of Mumbai 26/11 attacks. The whole world stands with France in this moment of grief.

I just tried penning what Paris might be feeling deep inside.

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कहलाता था मैं प्यार का शहर,
बरसा है मुझपे कैसा यह कहर,
अन्धाधुन्ध गोलियों की हुई थी बौछार,
मासूम लोगों पे हुआ घोर अत्याचार।

मैं दहल गया था बम के धमाके से,
पहले तो लगा जैसे यह शोर किसी पटाखे से,
हवा में गूँज उठी चीखें मेरे अपनों की,
और मिट्टी में मिल गई थी नींव अनेक सपनों की।

मेरे सीने पे जब गोलियों की बरसात हुई थी,
ऐसी भी एक भयानक काली रात हुई थी,
आतंकवाद से घिरा मैंने खुद को पाया,
खुदा के नाम पे जिन्होंने खुदा को ही गवाया।

करते हैं जो वारदात ऐसी धर्म के नाम पे,
बने फिरे वो सच्चे दूत, जो लगे हैं अपने काम पे,
जाने क्यों वो यह भूल हैं जाते,
किसी भी मज़हब में आतंकवाद नहीं सिखाते।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, मरता तो एक इंसान हैं,
गोली चले या बम धमाका, छलनी होता बस भगवान है,
एक दूसरे से प्यार में ही हर मज़हब की पहचान है,
गोली चले या बम धमाका, छलनी होता बस भगवान है।

Let’s #Pray4Paris and let’s strive to make World a better place to live.

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19 thoughts on “A Tribute to Paris Attacks!”

  1. Good one Simar.. Heartfelt condolences to the families who lost their loved ones:(

  2. khuda k naam pe khuda ko hi gawaya!! Lets pray for religious tolerance throughout the world!

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