With the country currently under the lockdown to contain the spread of Covid-19 Coronavirus outbreak, the restrictions are expected to impact the economy significantly. However, it has also helped the wounded and polluted Mother Nature heal itself and press the reset button.

While Ganga and Yamuna were found to be cleaner with lower industrial activity, the Air Quality across the Metro cities had also improved significantly.  All these positive impacts on Nature inspired me to write the below lines: 

प्रकृति का अल्पविराम

साफ होने लगी अब शहरों की हवा है,
वातावरण बचाने की शायद बची यही दवा है,
कुछ तो किया है कोरोना ने भी अच्छा काम,
यह तो है प्रकृति का एक अल्पविराम।

बड़ी दूर से दिखें अब पहाड़ हिमालय वाले,
दिख रहे हैं तारे और दृश्य मस्त निराले,
कोरोना तो हुआ है बेवजह ही बदनाम,
यह तो है प्रकृति का एक अल्पविराम।

कभी सुनते थे प्रदूषित नदियों की कहानी,
शीतल और स्वच्छ हुआ है अब उन्ही का पानी,
कौन लेगा इस सफाई अभियान का ईनाम,
यह तो है प्रकृति का एक अल्पविराम।

पक्षी भी खुल के चहचहाने लगे हैं,
मेरे सुर से सुर अब मिलाने लगे हैं,
अब तो है सजती यह महफिल सुबह शाम,
यह तो है प्रकृति का एक अल्पविराम।

जंगल के जानवरों ने भी नई आज़ादी पाई है,
डॉल्फिन ने कलाबाज़ियाँ अब कई जगह दिखाई हैं,
इसी दुविधा में था मैं कुछ दिन से परेशान,
ना जाने क्यूँ लिया है प्रकृति ने अल्पविराम।

रोज़ की भागदौड़ में हम बन बैठे थे नादान,
दुनिया है अपनी, लोग है अपने, यह भूल चुका इन्सान,
हम सभ अभी भुगत रहे हैं अपनी गल्तियों का अंजाम,
शायद तभी लिया प्रकृति ने यह छोटा अल्पविराम,
कुछ देर ही सही, पर धरती ने भी किया विश्राम,
यह तो है प्रकृति का एक छोटा सा अल्पविराम।

Do you agree with this? Don’t forget to share your thoughts in Comments below and stay safe.

5 thoughts on “Nature’s Time to Heal!”

  1. Superb.positive vibes of current situation…you always have amazing content to express

  2. Lovely ! well written !Its true, few people understand this.its nature healing.

  3. Its good to see self healing of mother nature during Covid-19 pandemic through above lines, beautiful…

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